शराब, सिगरेट और नशे की लत कैसे छोड़ें?
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संक्षेप में उत्तर
एकांतिक वार्तालाप में पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज समझाते हैं कि जब तक हम स्वयं सुधरना न चाहें, कोई हमें नहीं सुधार सकता — इसलिए पहले पूरा, पक्का संकल्प लीजिए। केवल यह जानना काफ़ी नहीं कि नशा गलत है; उसे न करने की क्षमता भी चाहिए, और नाम जप वह अध्यात्म बल देता है जिससे प्रतिज्ञा टिकती है। वे नशा मुक्ति केंद्र की औषधियों और नियमों का सहारा लेने को भी कहते हैं। शराब या कुछ नशे अचानक छोड़ना शरीर के लिए ख़तरनाक हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की देखरेख में छोड़िए, और सहायता के लिए Tele-MANAS 14416 (मुफ़्त, 24×7) पर बात कीजिए।
शायद शुरुआत दोस्तों के साथ हुई, या तनाव में, या "कभी-कभार" से। अब रोज़ की बात हो गई है — शाम को एक पैग, हर खाने के बाद बीड़ी-सिगरेट, दिन भर गुटका, या उससे भी भारी कुछ। आपने खुद से, और शायद घरवालों से भी, कितनी बार कहा है कि छोड़ दूँगा। फिर तलब उठती है, और सब वहीं का वहीं।
अगर आप ऐसा महसूस करते हैं, तो जान लीजिए — आप बुरे इंसान नहीं हैं, और अकेले भी नहीं हैं। एकांतिक वार्तालाप में कई लोग यही संघर्ष खुलकर रखते हैं — कुछ तो दशकों बाद — और उनमें से बहुत लोग बताते हैं कि वे इससे निकल आए। रास्ते के तीन हिस्से हैं: सच्चा निर्णय, उसे निभाने का भीतरी बल, और सही मदद ताकि यह सुरक्षित तरीके से हो।
पता है कि नुकसान हो रहा है, फिर भी छूटता क्यों नहीं?
तीस साल से नशे और गंदे आचरण में फँसे एक व्यक्ति ने पूछा कि जीवन भर अपनी प्रतिज्ञा कैसे निभाऊँ। महाराज जी का उत्तर जड़ तक जाता है: जब तक नाम जप रूपी अध्यात्म बल नहीं, तब तक कोई प्रतिज्ञा, कोई नियम, कोई जानकारी सफल नहीं होती 0:00। हमें पता है कि यह नहीं करना चाहिए, पर उसे न करने की क्षमता भी चाहिए — नहीं तो इंद्रियाँ और मन बड़े बलवान हैं, ज़बरदस्ती करवा लेंगे 0:00।
इसीलिए केवल इच्छाशक्ति अक्सर हार जाती है। ऐसा नहीं कि आपको परवाह नहीं — बस अभी तलब निर्णय से ज़्यादा बलवान है। गीता कहती है कि मन ही मित्र है और मन ही शत्रु; अपने प्रयास से अपना उद्धार करो (गीता 6.5)।
एकांतिक वार्तालाप नशा छोड़ने के बारे में क्या सिखाता है?
शुरुआत आपकी चाह से। कुसंग से शराब की आदत में पड़े एक युवक से महाराज जी ने साफ़ कहा — कोई किसी को सुधार नहीं सकता; अगर हम सुधरना चाहें, तो वाणी का, आत्म बल का, तपस्या का सहयोग मिल सकता है, पर हम न चाहें तो कोई नहीं सुधार सकता 31:25। इसलिए आज से नियम लीजिए: "मैं आज से शराब नहीं पिऊँगा" 31:25।
कोई जादू नहीं। वे स्पष्ट कहते हैं कि कोई चमत्कार करके शराब नहीं छुड़ाता। संत वचन पर श्रद्धा रखकर उसका पालन करने से ही बात बनती है 31:25। और यह सच में होता है — वे बताते हैं कि हज़ारों लोग ऐसे निकल गए 31:25।
निर्णय पूरा कीजिए। जब एक साधक ने कहा कि 95 प्रतिशत छोड़ दिया है, तो महाराज जी ने कहा — 95 नहीं, 100 प्रतिशत छोड़ो 0:00। आधा बंद दरवाज़ा बार-बार खुल जाता है।
दिखावा नहीं, सच्चाई। वे सावधान करते हैं कि हाथ में माला-झोली हो और आचरण वैसे ही रहें, तो कोई लाभ नहीं। सच्चाई से थोड़ा भी चलोगे, तो भगवान उतने से ही प्रसन्न हो जाते हैं 0:00।
पैसा प्रेम में लगाइए। जो पैसा नशे में जाता था, वह माता-पिता के चरणों में अर्पित कीजिए, उनकी सेवा कीजिए 31:2541:53।
गुटके को भी वे गंभीरता से लेते हैं। वे बताते हैं कि दाँतों के एक डॉक्टर ने उनसे कहा कि गुटके में केमिकल डाले जाते हैं और उन्होंने कई लोगों को कैंसर से तड़पकर मरते देखा है — इसलिए वे प्रेम से कहते हैं, इसे भी छोड़ दो 41:53।
क्या नशा छोड़ने के लिए डॉक्टर की मदद लेना ठीक है?
हाँ — और ऐसा करने को कहा भी गया है। ड्रग्स और नशे में फँसते बच्चों के बारे में महाराज जी कहते हैं कि उन्हें नशा मुक्ति केंद्र ले जाइए, जहाँ औषधियों के सेवन और नियमों के पालन से व्यसन छूटता है 33:20।
यह सुरक्षा की बात है। अगर आप लंबे समय से रोज़ या ज़्यादा शराब पी रहे हैं, या कुछ ड्रग्स या नींद की दवाएँ ले रहे हैं, तो अचानक छोड़ना शरीर के लिए ख़तरनाक हो सकता है — काँपना, घबराहट, भ्रम, यहाँ तक कि दौरे भी आ सकते हैं। निर्णय पक्का कीजिए, फिर डॉक्टर की देखरेख में छोड़िए। मुफ़्त और गोपनीय सहायता के लिए किसी भी समय Tele-MANAS 14416 (24×7) पर बात कीजिए। बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू छोड़ने में भी डॉक्टर दवा और परामर्श से बहुत मदद कर सकते हैं।
परिवार नशे में फँसे व्यक्ति की मदद कैसे करे?
महाराज जी माता-पिता से कहते हैं — बच्चों को समय दीजिए, पास बैठिए, मित्र की तरह बात कीजिए, उनकी कमियों को पहचानकर दूर कीजिए 33:20। डाँट-फटकार और शर्मिंदगी उन्हें और दूर करती है; अपनापन उन्हें लौटा लाता है।
और अगर पिता ही पीते हों, तो एक बेटे को उनकी सलाह थी — पिताजी में दोष-दर्शन मत करना, उनकी सेवा करते रहना, और स्वयं नशे से दूर रहना 41:53। फिर भी सुरक्षा पहले है: अगर नशे में घर में हिंसा होती हो, तो परिवार, काउंसलर या प्रशासन से मदद लीजिए।
नशा छोड़ने की कदम-दर-कदम योजना
- पहले डॉक्टर से मिलिए, अगर रोज़ पीते या लेते हैं, ताकि छोड़ने के लक्षण सुरक्षित ढंग से संभाले जा सकें 33:20।
- साफ़ संकल्प लीजिए, बोलकर: "आज से मैं शराब / बीड़ी / गुटका नहीं लूँगा।" 100 प्रतिशत का लक्ष्य रखिए 0:0031:25।
- रोज़ नाम जप शुरू कीजिए — सुबह-शाम कुछ मिनट ही सही — और जब भी तलब उठे, "राधा राधा" जपिए 0:0031:25।
- संग बदलिए। जिन जगहों और लोगों से यह आदत जुड़ी है, उनसे दूरी बनाइए 31:25।
- पैसा मोड़िए — माता-पिता और घर की ज़रूरतों की ओर 31:2541:53।
- किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति को बताइए, और कठिन दिनों में Tele-MANAS (14416) पर फ़ोन कीजिए।
- चूक हो जाए, तो अपराध-बोध में मत डूबिए। उसी दिन संकल्प फिर से लीजिए और आगे बढ़िए।
गीता बड़ी आशा देती है: बहुत गलत आचरण वाला व्यक्ति भी अगर अनन्य भाव से भगवान की ओर मुड़ जाए, तो उसे साधु ही मानना चाहिए, क्योंकि उसने सही निश्चय कर लिया है (गीता 9.30)।
अगर पुरानी गलतियों का बोझ भारी लगता है, तो पुराने पापों के अपराध-बोध से मुक्ति पढ़िए। मोबाइल की आदत के लिए मोबाइल की लत कैसे छोड़ें भी देखिए।
आज पहला दिन हो सकता है। निर्णय लीजिए, मदद माँगिए, और नाम को साथ रखिए — यह लड़ाई आपको अकेले नहीं लड़नी।
श्रीमद्भगवद्गीता से
Bhagavad Gita 6.5
उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत् ।आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥
अपने द्वारा अपना उद्धार करो, स्वयं को नीचे मत गिराओ। मन ही मनुष्य का मित्र है और मन ही उसका शत्रु।
गीता 6.5 का पूरा अर्थ →Bhagavad Gita 9.30
अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक् ।साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः ॥
यदि कोई अत्यंत दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भजन करता है, तो उसे साधु ही मानना चाहिए, क्योंकि उसने सही निश्चय कर लिया है।
गीता 9.30 का पूरा अर्थ →मूल सत्संग में सुनें
इस लेख के आधार एकांतिक वार्तालाप के अंश — सही समय से शुरू होते हैं।
0:00इस उत्तर का स्रोतनशा, वीर्यनाश और भोगों में फँसा हुआ हूँ, लेकिन अब सब कुछ छोड़ना चाहता हूँ।0:00 से · 4 मिनट
31:25इस उत्तर का स्रोतकुसंग के कारण शराब आदि की लत लग गई है, इसे छोड़ना चाहता हूँ।31:25 से · 3 मिनट
33:20इस उत्तर का स्रोतमाता पिता को पता भी नहीं चलता और बच्चे घर में ही सूखे नशे करना सीख जाते हैं ? माँ बाप अवश्य सुनें !33:20 से · 4 मिनट
41:53इस उत्तर का स्रोतजब किसी ने कहा पहले चोरी, शराब बीड़ी, खाता पिता था और नशे में माता पिता को पीटता था !41:53 से · 3 मिनट
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या शराब एकदम से छोड़ सकते हैं?
निश्चय पक्का कीजिए, पर छोड़ने की योजना डॉक्टर के साथ बनाइए। अगर लंबे समय से रोज़ या ज़्यादा पी रहे हैं, या कुछ ड्रग्स या नींद की गोलियाँ ले रहे हैं, तो अचानक छोड़ने पर ख़तरनाक लक्षण — दौरे तक — आ सकते हैं। डॉक्टर या नशा मुक्ति केंद्र सुरक्षित तरीके से छुड़ाने में मदद करते हैं। मुफ़्त और गोपनीय सहायता के लिए किसी भी समय Tele-MANAS 14416 पर फ़ोन कीजिए।
कसम खाई थी, फिर भी टूट गई। क्या मेरे लिए कोई उम्मीद है?
बिल्कुल है। एकांतिक वार्तालाप में महाराज जी समझाते हैं कि जब तक अध्यात्म बल नहीं, तब तक कोई प्रतिज्ञा, कोई नियम सफल नहीं होता, क्योंकि इंद्रियाँ और मन बड़े बलवान हैं। इसका अर्थ हार मानना नहीं, बल बढ़ाना है। संकल्प फिर से लीजिए, रोज़ नाम जप जोड़िए, व्यावहारिक मदद लीजिए और लगे रहिए — बहुत लोग इससे निकले हैं।
क्या गुटका और पान मसाला सच में इतना नुकसानदायक है?
एक सत्संग में महाराज जी बताते हैं कि दाँतों के एक बड़े डॉक्टर ने उनसे कहा था कि गुटके में केमिकल डाले जाते हैं और उन्होंने कई लोगों को इससे कैंसर होकर तड़पते हुए मरते देखा है। महाराज जी प्रेम से कहते हैं — इसे छोड़ दो, और वही पैसा माता-पिता की सेवा में लगाओ। तंबाकू छोड़ने में डॉक्टर भी मदद कर सकते हैं।
मेरे पिताजी शराब पीते हैं। क्या मैं उनसे दूरी बना लूँ?
ऐसे ही एक बेटे को महाराज जी ने कहा था कि पिताजी में दोष मत देखो, उनकी सेवा करते रहो, और स्वयं नशे से दूर रहो। पर अपनी और परिवार की सुरक्षा भी ज़रूरी है — अगर नशे में घर में मारपीट होती हो, तो परिवार, काउंसलर या प्रशासन से मदद लीजिए।
बच्चा नशा करने लगा है, उसकी मदद कैसे करें?
महाराज जी माता-पिता से कहते हैं कि बच्चों को समय दीजिए, पास बैठकर मित्र की तरह बात कीजिए, उनकी कमियाँ पहचानिए। अगर खुद दूर न कर सकें, तो नशा मुक्ति केंद्र ले जाइए, जहाँ औषधियों और नियमों से व्यसन छूटता है। डाँट और शर्मिंदगी की जगह शांत और प्रेम भरा व्यवहार रखिए।
आपके मन में भी कोई प्रश्न है?
सारथी से हिंदी, English या Hinglish में पूछिए — सत्संग पर आधारित उत्तर, स्रोत के साथ।
यह लेख ऊपर दिए गए सत्संग स्रोतों के आधार पर AI (Claude) की सहायता से लिखा गया है। स्रोत स्वतः-लिखित (auto-transcribed) हैं — सटीक शब्दों के लिए मूल वीडियो सुनें। सारथी एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट है; यह पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज, उनके आश्रम या भजन मार्ग चैनल से संबद्ध या उनके द्वारा अनुमोदित नहीं है। यह चिकित्सा, कानूनी या मानसिक-स्वास्थ्य सलाह का विकल्प नहीं है।
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